बगलामुखी शत्रु विनाशक मारण मंत्र

बगलामुखी शत्रु विनाशक मारण मंत्र


काली माँ के मंदिर में आपने अक्सर देखा होगा माता के मूर्ति के बायीं ओर एक और देवी की मूर्ति होती हैं, जिनके एक हाथ में गदा और दूसरे हाथ में स्वयं का सिर होता हैं, जिसमे से जीभ बाहर निकल रहा होता हैं| यह देवी बगलामुखी की प्रतिमा होती हैं, जो माँ काली का ही एक स्वरूप हैं|

बगलामुखी शत्रु विनाशक मंत्र

देवी बगलामुखी को पीतांबरी देवी भी कहा जाता हैं, क्योकि वो पीले कपड़े पहनती हैं और स्वर्ण आभूषण पर बैठती हैं| देवी बगलामुखी बहुत ही शक्तिशाली देवी मनी जाती हैं,जो बुरी शक्तियों का नाश करने वाली होती हैं|

बगलामुखी शत्रु विनाश मंत्र के प्रयोजन– बगलामुखी देवी की याचना लोग अपनी समस्याओं से निजात पाने के लिए करते हैं| माता के मंत्र जाप से देवी का क्रोध शांत होता हैं और हमे धन्य-धान्य की प्राप्ति होती हैं| परंतु इस मंत्र का विशेष प्रयोजन शत्रु से छुटकारा पाने के लिए किया जाता हैं| वास्तव में बगलामुखी मंत्र बहुत ही ताकतवर होते हैं|

माँ बगलामुखी मंत्र जाप के लाभ-

  • माँ बगलामुखी के मंत्र जाप से जीवन के कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान हो जाता हैं|
  • माँ बगलामुखी के मंत्र जाप करने से जीवन में विद्या, बुद्धि, ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस मंत्र के जाप से एक व्यक्ति अपने जीवन में वांछित वस्तु प्राप्त करता है।
  • माँ बगलामुखी का मंत्र जप करने से ऐसे तंत्र मंत्र का भी काट संभव हैं, जो अन्य किसी ज्योतषीय विधि से संभव नहीं हैं|
  • माँ बगलामुखी के उपासक पर किसी प्रकार के काला जादू या तंत्र मंत्र का प्रभाव नहीं पड़ता हैं|
  • इस मंत्र का जप हमे घर में विद्यमान किसी भी प्रकार के नकारात्मक शक्ति से छुटकारा प्रदान करवाता हैं|
  • यदि आप माँ काली के उपासक हैं,तो आप पर माँ बगलामुखी की कृपा बनी रहेगी|

बगलामुखी माता का मारन मंत्र – Baglamukhi Mata Ka Maran Mantra

बगलामुखी माता का मारन मंत्र – Baglamukhi Mata Ka Maran Mantra, तंत्र शास्त्र के अनुसार, माँ काली का ही पीला रूप बगलामुखी हैं| इसलिए उन्हे ‘पितकली’ भी कहा जाता हैं| पूरी तरह से पीले होने और पीले वस्त्र धारण करने की वजह से, उन्हे पीताम्बर भी कहा जाता हैं| वैसे तो मां काली को तंत्र मंत्र की देवी माना जाता है, लेकिन उनके मूल रूपों में से एक, “माँ बगलामुखी” का सिद्ध जादू मंत्रों में पहला स्थान है।

शक्तिशाली बगलामुखी भय मारन मंत्र-

मंत्र- “रक्तबीजवधे देवी चंडमुंडविनाशिनी| जयंती मंगलकाली भद्रकाली कपालिनी| देवी पीताम्बरी मम बाधा मोचनम् करिष्यति इति वदित कुरु स्वाहा|”

प्रक्रिया– उपयुक्त रूप से वर्णित बगलामुखी मंत्र भय से राहत प्रदान करने वाला है। यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के भय से पीड़ित है, तो उसे वर्णित के रूप में बगलामुखी मंत्र का जाप करनी चाहिए। इस मंत्र के नियमित तीन माला जाप करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाएंगे। माँ बगलामुखी इस मंत्र के जाप से उत्पन्न सिद्धि के परिणामस्वरूप आत्मविश्वास और निर्णायक बुद्धि की शक्ति का आशीर्वाद देती है।
शक्तिशाली पिशाचबाधा मुक्ति मंत्र-

मंत्र – “ॐ जय देवी चामुंडे जय भूतार्तिहरिणी जय सर्वगते देवी कालरात्रि नमोअस्तुते|”

प्रक्रिया– भूत प्रेत बाधा से छुटकारा पाने के लिए हर शनिवार को मां काली के मंदिर में जाएं, जहां मां बगलामुखी की मूर्ति भी हो, वहां उपयुक्त मंत्र का 108 बार जाप करें। जप के बाद जलती हुई हवन कुंड की राख से माता के चरणों में टीका लगाएं और इसके बादस्वयं को टीका लगाएं| प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद घर वापस लौटआएं। इस मंत्र का जाप करने के तीन शनिवार बीतने के साथ, आप पर सभी प्रकार के जादू टोने का प्रभाव समाप्त हो जाएगा और आप सभी प्रकार के भूतों के भय से मुक्त हो जाएंगे।

शत्रु नाशक बगलामुखी साधना – Shatru Nashak Baglamukhi Sadhana

शत्रु नाशक बगलामुखी साधना – Shatru Nashak Baglamukhi Sadhana, जैसा की हम जानते हैं कि देवी बगलामुखी अपने शत्रु पर नियंत्रण करने की शक्ति प्रदान करती हैं| अत: यदि कोई शत्रु आप पर किसी प्रकार का जादू टोना कर रहा हो, तो बगलामुखी मंत्र के जाप से आप इस जादू टोने के असर को खत्म कर सकते हैं| शत्रु के नाश के लिए माँ बगलामुखी के साधना की प्रक्रिया का वर्णन निम्नलिखित हैं:-

पूजा विधि-पूजा की विधियों का आरंभ वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से होता हैं| पूजा किसी वैदिक ज्ञाता अथवा किसी जानकार ज्योतिष के द्वारा ही सम्पन्न करवानी चाहिए|
वैदिक पूजा की प्रक्रिया-

सफलता के लिए मंगलाचरण या प्रार्थना- पूजा आरंभ करने से पहले सभी देवी-देवता और पूर्वजो का आवाहन किया जाता हैं, ताकि वो पूजा में भाग ले सके| ऐसा सभी के कल्याण के लिए किया जाता हैं|

संकल्प या उद्देश्य की घोषणा– यह बहुत ही महत्वपूर्ण हैं| आप जिस किसी भी मकसद से अनुष्ठान कर रहे हैं, पहले उसका संकल्प लेना पड़ता हैं| उदाहरण के लिए आप शत्रु नाश बगलामुखी साधना कर रहे हैं, तो आपको हाथ में जल लेकर अपने शत्रु का नाम लेते हुए उसके नाश का संकल्प लेना होगा|
गणेश पूजन– पूजा का प्रारंभ गणेश पूजन से की जाती हैं| अखंडित संकल्प के उद्देश्य के प्राप्ति हेतु गणेश जी का आवाहन किया जाता है|
कलश पूजन-प्रत्येक पूजा में कलश पूजन का विशेष महत्व हैं| इसके माध्यम से हम सुख-समृद्धि की कामना करते हैं|
शुद्ध वचन याधार्मिक संस्कार – कल्याण की कामना के लिए और शत्रु के दमन के संकल्प के साथ इस शक्तिशाली बगलामुखी मंत्र का उच्चारण किया जाता हैं|

मंत्र- “तव च का किल निखिल्मुर्तिषु मानसिजासू वचिन्त शमिताशिवे|”

आरती अनुष्ठान– आरती और अनुष्ठान के बाद पूजा समाप्त हो जाता हैं| इस साधना के सफल प्रयोग से आपको अपने मनवांछित फल की प्राप्ति होती हैं| आपका शत्रु चाहे कितना भी प्रभावकारी क्यूँ ना हो, उसका दमन निश्चित हैं|