वशीकरण

पति वशीकरण


ॐ नमो महायक्षिण्ये मम पति में वश्यं कुरू कुरू स्वाहा।

यह मंत्र एक लाख बार जाप करने से सिद्ध हो जाता है। पति को वश में करने के लिए प्रतिदिन 108 बार जाप करने से पति पत्नी के वशीभूत हो जाते हैं।

मंत्र
ॐ नमो महायक्षिणी मम पति दश्य मानय कुरू स्वाहा ।
इस मंत्र को पहले एक हजार बार जपकर सिद्ध कर लेना चाहिए। फिर स्त्री गुरुवार के दिन केले का रस, सिंदूर और अपनी योनि का रक्त मिलाकर सात बार उपरोक्त मंत्र से अभिमंत्रित कर मस्तक पर बिंदी लगाने से पति वश में हो जाता है।

मंत्र
ॐ हीं श्रीं क्रीं थिरिं ठः ठः अमुकं वश करोनि ।
यह मंत्र दस हजार बार जाप करने से सिद्ध हो जाता है। शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि को गोरैया पक्षी के मांस को मंत्र से अभिरमंत्रित कर थोड़ा-सा पान में रखकर पति को खिलाने से वह एक क्षण के लिए भी पत्नी से दूर नहीं रहता है।

Featured अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच

अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच


हम आपको बताते है अप्सरा साधना के बारे मे की किस प्रकार आप इसे कर सकते है। जैसा की हमेशा से यह मान्यता रही है कि अप्सराओ को गुलाब, चमेली, रजनीगंधा और रातरानी जैसे फूलों की सुगंध काफी पसंद आती है। अप्सरा साधना करने के दौरान उस व्यक्ति को खास तौर पर अपनी यौन भावनाओं पर संयम रखना पड़ता है। ऐसा न कर पाने से साधना सिद्ध नहीं हो पाती है। साधक पूरे विश्वास और संकल्प व मंत्र की सहायता से अगर इस साधना को करता है, तो माना गया है कि अप्सरा प्रकट होती है और उस समय वो साधक उसे गुलाब के साथ इत्र भेंट करता है। साथ ही उसे दूध से बनी मिठाई व पान आदि भेंट देता है और उससे जीवन भर साथ रहने का वचन लेता है। इन अप्सराओ मे चमत्कारिक शक्तिया होती है जो साधक की जिंदगी को सुंदर बनाने की योग्यता रखती है।

अब हम आपको रंभा अप्सरा साधना के बारे मे जानकारी देते हुए बताएँगे की इस साधना को करने के लिए आपको इस मंत्र का जप करना होता है, जोकि इस प्रकार है, मंत्र:

ऊँ दिव्यायै नमः! ऊँ वागीश्वरायै नमः!

ऊँ सौंदर्या प्रियायै नमः! ऊँ यौवन प्रियायै नमः!

ऊँ सौभाग्दायै नमः! ऊँ आरोग्यप्रदायै नमः!

ऊँ प्राणप्रियायै नमः! ऊँ उजाश्वलायै नमः! ऊँ देवाप्रियायै नमः!

ऊँ ऐश्वर्याप्रदायै नमः! ऊँ धनदायै रम्भायै नमः!

बाकी साधना के जैसे इसमे भी साधक को पूजा-अर्चना के बाद रम्भेत्किलन यंत्र के सामने बताए मंत्र का जप करना होता है। साधना हो जाने के बाद साधक की इक्छा पूर्ण होने के साथ उसके जीवन मे खुशियों आ जाती है।

अप्सरा साधना विधि को करने के लिए साधक के लिए जरूरी होता है कि वो कोई एक शांत जगह चुन ले। फिर उस जगह पर सफ़ेद रंग का एक कपड़ा बिछाकर, पीले चावल के इस्तेमाल से एक यंत्र का निर्माण करे। इसके बाद साधक के लिए जरूरी है कि वो अपने वस्त्र पर इत्र लगा ले जिससे वो सुगन्धित हो जाये और मखमल को अपना आसन बनाए। केवल शुक्रवार के दिन, आधी रात को आप इस साधना करे। ध्यान जरूर रखे की साधना करते वक़्त आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो और फिर बनाए हुए यंत्र का पंचोपकर पूजन करे। जिस एकांत जगह या कमरे मे साधक बैठा है वो वहाँ गुलाब के इत्र का प्रयोग करे। आस-पास एक सुगन्धित माहोल बना ले। इन सबके बाद आप गुरु गणपति का ध्यान करके स्फटिक मणिमाला का मंत्र के साथ 51 जप करे। मंत्र: “ऊँ उर्वशी प्रियं वशं करी हुं! ऊँ ह्रीं उर्वशी अप्सराय आगच्छागच्छ स्वाहा!!” इस अनुष्ठान को आप कुल 7, 11 या 21 दिनों तक करे और आखिरी दिन 10 माल का जाप करे। बताए मंत्र के नीचे अपना नाम लिखकर उर्वशी माला की मदद से बताए मंत्र का 101 बार जप करे, मंत्र: “ऊँ ह्रीं उर्वशी मम प्रिय मम चित्तानुरंजन करि करि फट”।

अप्सरा वशीकरण साधना से जुड़े एक शाबर मंत्र के बारे मे भी हम आपको बताते है। जिसको करने के लिए जरूरी है की आप एक बाजोट पर लाल रंग का कपड़ा बिछा ले और उस पर एक चावल से ढेरी बना ले, जो कुम्कुम से रंगे हो। आप जिस आसान पर बैठे वो भी लाल रंग का ही हो। इसके बाद उन चावल पर “पुष्पदेहा आकर्षण सिद्धि यंत्र” स्‍थापित कर दे और स्फटिक की माला से मंत्र जाप करे। मंत्र: “ॐ आवे आवे शरमाती पुष्पदेहा प्रिया रुप आवे आवे हिली हिली मेरो कह्यौ करै,मनचिंतावे,कारज करे वेग से आवे आवे,हर क्षण साथ रहे हिली हिली पुष्पदेहा अप्सरा फट् ॐ ”। शुक्रवार के दिन इस साधना को शुरू करे जो 7 दिनों तक चलती है। आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो इसका खास ध्यान रखे और मंत्र का रोज 11 माला जप करना होगा। बनाए हुए यंत्र पर रोज गुलाब का इत्र चढाये और 5 गुलाब भी चढा दे। घी का दीपक जला दे, जो साधना विधि के समय जलता रहे। आप जो धूप इस्तेमाल करे वो गुलाब का ही हो। जब मंत्र का जप किया जा रहा हो उस समय नजर यंत्र की ओर होनी चाहिए। इसी यंत्र के माध्यम से साधक को अप्सरा से वचन प्राप्त करने का मंत्र प्राप्त होता है।